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Tuesday, January 14, 2014

बस ऐसे ही

जिनको जिंदगी से हम अपनी निकाल देते हैं
वही अपने दिल से हमें निकाल देते हैं

बस यूँही

जिंदगी की दूरी तो वो बढ़ा ही रही थी
फिर दिल की दूरियां क्यूँ उन्होने बढ़ा दी

Saturday, July 27, 2013

बस ऐसे ही

निर्मोही नहीं थे वो निर्मम थे
वरना बेरुखी मे भी कभी अपने प्यार को याद तो करते

Friday, August 24, 2012

बस यूँही

भूल कर भी जो कभी  नहीं थे भूलते
भूल कर भी वो अब याद नहीं करते


Sunday, October 2, 2011

बस ऐसे ही

किसी इंसा को प्यार करके उसको खुदा बनाना
बेहतर होता खुदा से प्यार करते और खुद को इंसा बनाते

Wednesday, September 14, 2011

बस यूँ ही

बरस बरस पर बरसे हैं बादल और आखें
बरस बरस पर बरसने को तरसे हैं बादल और आंखे

Saturday, August 27, 2011

बस ऐसे ही

गैरो को जो अपना बनाते हैं
अपनों को बस वही छोड़ जाते हैं

Thursday, April 7, 2011

बस यूँ ही

जब भी कुछ ऐसा करना का मन होता हैं
जो किसी के लिये ना किया हो
नाम तुम्हारा जहन मे आ ही जाता हैं
बस यूँ ही

Wednesday, February 9, 2011

बस ऐसे ही

कमी कुछ स्नेह मे हमारे ही कम होगी
वर्ना सपनो मे उनकी आवाजाही कम न होती

Wednesday, January 12, 2011

बस यूँ ही

दिल मे मेहमान बनकर जो आते हैं
जिन्दगी से दुश्मन बनकर वही जाते हैं

Monday, August 2, 2010

बस ऐसे ही

लो तुमको भुला दिया मन को अपने समझा लिये
इसी बहाने फिर ना जाने कितनी बार तुमको याद किया

Tuesday, April 13, 2010

बस यूं ही

तुम्हरी जरुरत के लिये किया था प्यार तुमसे
अब तुम्हे जरुरत नहीं हैं इसीलिये ये दूरी हैं

Saturday, September 26, 2009

बस ऐसे ही

असंभव को सम्भव
करने की चाहत मे
यादो को भुलाने की कोशिश
बदस्तूर ज़ारी हैं

Thursday, July 16, 2009

बस यूं ही

हाले दिल पूछा

किसी ने फिर आज

तुम फिर याद आगये

Monday, May 25, 2009

बस ऐसे ही

आंसूं ही बस अपने होते हैं
इसीलिये तो लोग अकेले मे रोते हैं

Monday, March 30, 2009

बस यूं ही

कभी कभी

कितना सुकूं देता हैं

किसी का

बस यूँही

हमें भूल जाना

Saturday, March 28, 2009

बस ऐसे ही

आज फिर आँख मे आया एक आंसू आप के नाम का बहने नहीं दिया पानी हो जाता
आज फिर आँख मे आया एक आंसू आप के नाम का बहने नहीं दिया रुसवा कर जाता

Saturday, March 14, 2009

बस यूं ही

जिन रिश्तों का नाम होता हैं
वही रिश्ता बदनाम होता हैं

Wednesday, November 12, 2008

बस ऐसे ही

ये तो न इंसाफी हुई
जान तो गयी
पर पहचान ना हुई

Tuesday, November 11, 2008

बस यूं ही

हम से मिल कर आप को जो खुशी हुई
आपने शब्दों मे बयाँ की
आप से मिल कर हमे जो खुशी हुई
शब्द ही नहीं हैं कैसे बयां करे

Saturday, October 11, 2008

बस ऐसे ही

दर्द आया था महमां बनकर
गया पर जां ले कर

Saturday, August 2, 2008

बस यूं ही

ना चाहते हुए भी याद का आना
साथ ना होते हुए भी साथ होना

Monday, June 2, 2008

बस ऐसे ही

नहीं मिलने कि आस हैं

आज फिर मन उदास हैं

Monday, April 21, 2008

बस यूं ही

कभी कभी जिन्दगी मे कुछ ऐसे रिश्ते भी होते हैं
जो हमारे नहीं होते पर हम याद उन्हे ही करते हैं

Thursday, April 3, 2008

बस ऐसे ही

झांकते हैं दूसरो की जिंदगियों मे जो
भूल जाते हैं कि ख़ुद भी हो रहे है बेपर्दा वो

Tuesday, March 18, 2008

बस यूं ही

अनजाने मे जिनमे कुछ होता है
रिश्ता उनका ही गहरा होता हैं

Monday, March 10, 2008

बस ऐसे ही

बिना मोड़ के जो मुड़ते हैं
उनके ही कदमो के निशाँ से
मोड़ नये बनते है

Sunday, March 9, 2008

बस यूं ही

धूप मे छाँव मे संग मे साथ मे
मन मे तन मे आस हैं प्यास है

Saturday, February 9, 2008

बस ऐसे ही

समझोते की चारपाई तुमने बिछाई वो सोई
तुम भी अधूरे उठे वो भी अधूरी उठी

Thursday, January 24, 2008

बस यूं ही

दोहरे मापदंड है जिनके
तन गोरे मन काले है उनके

Monday, January 7, 2008

बस ऐसे ही

देर से पहुचती बाराते
ठंडा परसा खाना
ठंडे पड़ते रिश्ते

Saturday, December 29, 2007

बस यूं ही

दोहरे मापदंड है जिनके
तन गोरे मन काले है उनके

बस ऐसे ही

मंदिर मे राधा को पूजते है जो
जिन्दगी मे राधा को दुत्कारते है वो

Tuesday, December 25, 2007

बस यूं ही

खुद ने कहा , खुद ने सुना
दस्ताने मुहब्बत यूं ही
महसूस किया

बस ऐसे ही

नासमझ और पागल ही प्यार करते है
बाक़ी सब तो समझोते और व्यापार करते है

Sunday, December 23, 2007

बस यूं ही

तुम्हारे गुनाह की सजा
की मुकर्र हमने
करके माफ़ तुमको
तुम बस यूं ही गुनाह
करते रहो
हम बस ऐसे ही माफ़
करते रहेगे

Saturday, December 22, 2007

बस ऐसे ही

कुर्बानी दे कर आंसू बहाते है जो
कुर्बानी का सबाब क्या पायेगे वो

Sunday, December 16, 2007

बस यूं ही

बडे बद नसीब
होते हो वो
ढ़ूढ़ते हे समान अपना
दूसरो के घरो मे जो

Saturday, December 8, 2007

बस ऐसे ही

पल्ले मे बंधता है अधिकार,
मुठ्ठी मे बंधता है प्यार
मुठ्ठी भर प्यार ही देता है
फिर जिन्दगी संवार

Sunday, December 2, 2007

बस यूं ही

जिन्दगी की धूप छाँव मे धूप ने इतना तपाया
कि छाँव की आदत ही
नहीं रही मुझको ।

Wednesday, November 28, 2007

बस ऐसे ही

अपने झूठ को सच कहते है जो
मेरे सच को झूठ समझते है वो

Thursday, November 22, 2007

बस यूं ही

रिश्तों मे होती है एक कमजोर कडी
टूट जाये तो होती है मुश्किल बड़ी

Monday, November 19, 2007

बस ऐसे ही

खाक को समझे चिंगारी चिंगारी को ख़ाक समझे
मरने पर जो समझे वह क्या ख़ाक समझे

बस यूं ही

कुछ कहने से गर कोई समझा तो क्या समझा
मरने के बाद कोई जाना तो क्या जाना

Friday, November 16, 2007

बस ऐसे ही

जिन्हे आना होता है वह रूक नहीं पाते है
उनके लिये रास्ते खुद ब खुद बन जाते है

बस यूं ही

उन्हे ना आना था , वह नहीं आये
रास्ते हमने , नाजाने , कितने बनाये ।

Wednesday, November 14, 2007

बस ऐसे ही

क्या दिया हैं अब तक जो आगे नहीं दोगे
अरे जिनके थे उन्ही के ना हुये तो हमारे क्या होगे

बस यूं ही

झूठ की दीवारे हैं जिनके घरो की उनके
पैरो तले जमीन कभी भी खिसक सकती है

बस ऐसे ही

मोहब्बत समझी नहीं की जाती है
ज़िन्दगी पलों मे जीं जाती है

बस यूं ही

आ जायें तो सांस है वो
ना आयें तो आस है वो

बस ऐसे ही

दर्द भी वो है दवा भी वो है
मेरे लिये तो खुदा भी वो है

बस यूं ही

मेरे आस पास ही है ठिकाना उनका
मेरे शब्दो मे है आना जाना उनका

बस यूं ही

कितनी शामे बीती
कितनी राते आयी
पर
वह सुबह नहीं आयी
जब बीती शाम
और
बीती रात की
याद ना आयी

बस ऐसे ही

जो कभी बसे ही नहीं
उजड़ने का क्यूँ कर डर उनको होगा
जो कभी जीये ही नहीं
मरने का क्यूँ कर डर उनको होगा